पश्चिम बंगाल की बीरभूम की तृप्ति मुखर्जी को नक्शी कांथा (पारंपरिक कढ़ाई) की कला के जरिए देश की संस्कृति को दुनिया के सामने लाने के लिए पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा। उन्हें पहले कांथा कढ़ाई को बढ़ावा देने और बेहतर बनाने में उनके योगदान के लिए 'शिल्पगुरु' (मास्टर क्राफ्ट्समैन) अवॉर्ड और प्रेसिडेंशियल अवॉर्ड मिल चुका है।
कांथा स्टिच या नक्शी कांथा कला क्या है?
नक्शी कांथा बंगाली कल्चर का एक बहुत अहम हिस्सा है।
कांथा स्टिच (Kantha Stitch) या नक्शी कांथा कला (Nakshi Kantha) एक पारंपरिक हस्तकढ़ाई कला है, जिसकी जड़ें खासकर बंगाल क्षेत्र (पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश) में हैं।
यह साधारण रनिंग स्टिच (सीधी सिलाई) से की जाने वाली कढ़ाई है।
“नक्शी” का अर्थ है डिज़ाइनदार और “कांथा” का मतलब है रजाई या सिलाई किया हुआ कपड़ा।
आज यह आर्ट, फैशन और डेकोर का अहम हिस्सा है
आज किन चीज़ों में दिखती है?
रजाई / बेडस्प्रेड
दुपट्टा, साड़ी, कुशन कवर
वॉल हैंगिंग, बैग, टेबल रनर
कांथा बनाम नक्शी कांथा (छोटा सा फर्क)
कांथा स्टिच → सिलाई की तकनीक
नक्शी कांथा → उसी तकनीक से बना डिज़ाइन-आधारित कलात्मक काम
सरकार ने वर्ष 2026 के लिये 131 पद्म अलंकरणों की घोषणा की है। इनमें 5 पद्मविभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्मश्री पुरस्कार हैं। अलंकृत किये जाने वालो में 19 महिलाएं हैं। 16 लोगों को मरणोपरांत ये सम्मान दिये जा रहे हैं।



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