स्वदेश लौटीं चोल काल की दुर्लभ तांबे की प्लेटें, नीदरलैंड ने भारत को सौंपी ऐतिहासिक धरोहर

 


नीदरलैंड ने PM मोदी की यात्रा के दौरान शनिवार 16 मई को औपचारिक रूप से 11वीं शताब्दी के चोल काल के तांबे के बर्तनों का एक सेट भारत को लौटा दिया। 

यूरोप में ‘लीडेन प्लेट्स’ के नाम से मशहूर ये कलाकृतियां चोल साम्राज्य के सबसे ऐतिहासिक रूप से मूल्यवान जीवित अभिलेखों में से हैं। भारत 2012 से ही इनकी वापसी की मांग कर रहा था।



क्या है इन प्लेटों में?

तांबे की इन प्लेटों के सेट में कुल 24 प्लेटें हैं. इनमें 21 बड़ी और 3 छोटी प्लेटें शामिल हैं. इनका कुल वजन लगभग 30 किलोग्राम है. ये सभी प्लेटें एक बड़ी कांस्य की अंगूठी से आपस में जुड़ी हुई हैं. इस अंगूठी पर चोल राजवंश की शाही मुहर लगी हुई है. इन अभिलेखों में मुख्य रूप से चोल राजवंश के महान शासकों राजाराज चोल प्रथम और राजेंद्र चोल प्रथम से जुड़े शाही अनुदानों और प्रशासनिक आदेशों का जिक्र है.

इन अभिलेखों में नागपट्टिनम में स्थित चूड़ामणि विहार बौद्ध मठ निर्माण और रखरखाव के लिए दिए गए दान के बारे में लिखा है. इन प्लेटों का ऐतिहासिक महत्व इस वजह से भी बढ़ जाता है क्योंकि इन पर लिखे अभिलेख दो भाषाओं में है. संस्कृत वाले हिस्सों में मुख्य रूप से चोल राजाओं की वंशावली और शाही वंश का जिक्र है और तमिल वाले हिस्सों में जमीन के दान, राजस्व व्यवस्था, प्रशासन और टैक्स के बारे में पूरी जानकारी दी गई है.

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